21 जनवरी 2019 - 15:07
सऊदी अपराधों पर राष्ट्रसंघ की चुप्पी, इस संघ के लिए कलंक का टीका हैः मीडिया पार्ट

सऊदी अरब और उसके गठबंधन के हमलों में अब तक 15 हज़ार से अधिक यमनी मारे जा चुके हैं जिसमें ध्यान योग्य संख्या बच्चों और महिलाओं की है।

सऊदी युद्धक विमानों ने हालिया दिनों में यमन की राजधानी सनआ पर अपने पाश्विक हमलों में गति प्रदान कर दी है जिसके कारण सैकड़ों यमनी घायल व हताहत हुए हैं। यह उस स्थिति में है जब सऊदी अरब यमन के अलहुदैदा प्रांत में तीन हज़ार 273 बार युद्ध विराम का उल्लंघन कर चुका है।

यमन की त्याग पत्र दे चुकी मंसूर हादी की सरकार और सऊदी अरब का अतिक्रमणकारी गठबंधन किसी प्रकार के समझौते के प्रति वचनबद्ध नहीं है और वह यथावत युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है।

सऊदी अरब और उसके गठबंधन के हमलों में अब तक 15 हज़ार से अधिक यमनी मारे जा चुके हैं जिसमें ध्यान योग्य संख्या बच्चों और महिलाओं की है। सऊदी अरब और उसके पिट्ठूओं के अपराधों के मुकाबले में राष्ट्रसंघ का कमज़ोर क्रिया-कलाप ख़तरनाक प्रक्रिया है और उसका यह क्रिया- कलाप इस संघ की जिम्मेदारियों से विरोधाभास रखता है और यमनी जनता और विश्व जनमत राष्ट्रसंघ के क्रिया- कलापों से अप्रसन्न हैं।

लेबनान के अलमनार टीवी चैनल ने अपनी रिपोर्ट में घोषणा की है कि स्वीडन में हुए युद्धविराम के समझौते को अतिक्रमणकारी यमन में लागू नहीं करना चाहते और वे राष्ट्रसंघ के दबाव में ही युद्धविराम का पालन करेंगे।

अलमनार टीवी चैनल के रिपोर्टर ख़लील अम्री ने इस बात की पुष्टि करते हुए बल देकर कहा है कि यमनी पक्षों ने स्वीडन में होने वाले युद्ध विराम समझौते का पालन किया है परंतु अतिक्रमणकारी अब भी इस समझौते पर अमल नहीं कर रहे हैं।

स्वीडन में होने वाले संघर्षविराम समझौते के अनुसार समस्त अतिक्रमणकारियों को यमन के अलहुदैदा के पूर्व और दक्षिण से पीछे हटना चाहिये परंतु यमन में होने वाले परिवर्तन इस बात के सूचक हैं कि अतिक्रमणकारी राष्ट्रसंघ और अंतरराष्ट्रीय कमेटी के दबाव के बिना युद्ध विराम के समझौते का पालन नहीं करेंगे और जिन क्षेत्रों से उन पीछे हट जाना चाहिये वहां वे नये अड्डे बना रहे हैं।

फ्रांस से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र "मीडिया पार्ट" ने यमन में सऊदी अतिक्रमणों व अपराधों पर राष्ट्रसंघ की चुप्पी को इस संघ के लिए कलंक का टीका बताया है। सऊदी अरब और उसके पिछलग्गूओं की अपेक्षा यह है कि जो कुछ वे युद्ध से प्राप्त नहीं कर सकें हैं उसे वार्ता और समझौते से हासिल कर लें।

इस प्रकार के वातावरण में राष्ट्रसंघ ने चुप्पी साधकर व्यवहारिक रूप से यह दर्शा दिया है कि वह यमन के खिलाफ अतिक्रमणकारियों के साथ है और यह वह चीज़ है जिसकी विश्व जनमत विशेषकर यमनी जनता तीव्र आलोचना कर रही है।